SAJHA SANGHARSH VOL 17
By SAJHA SANGHARSH
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साझा संघर्ष – सितम्बर 2025 (VOL 17)
इस अंक में हम समाज, सत्ता और स्वशासन के गहरे सवालों को उठाते हैं। शीर्ष आलेख “सरकार सोती रही, जनता रोती रही” वर्तमान शासन की संवेदनहीनता पर करारा प्रहार करता है। “पेसा अधिनियम की आत्मा – स्वशासन, स्वाभिमान और स्वाभाविक जीवन” लेख आदिवासी स्वशासन की अवधारणा को उसके मूल स्वरूप में समझाने का प्रयास करता है। इसी क्रम में “आदिवासी गणराज्य: अतीत की जड़ों से भविष्य की राह पर” लेख उस ऐतिहासिक यथार्थ को सामने लाता है जहाँ ग्रामसभा ही संसद थी और जनता ही शासक।
इसके साथ ही “कुरमी आन्दोलन और अनुसूचित जनजाति की पहचान का संकट” जैसे गंभीर विषय पर विमर्श प्रस्तुत किया गया है। झारखंड जनाधिकार महासभा (28 सितंबर, 2025) की झलक भी इस संस्करण में दी गई है।
क्षमा याचना:
संपादकीय टीम पाठकों से इस अंक के विलंबित प्रकाशन के लिए क्षमा चाहती है। व्यस्त कार्य-समय और तकनीकी कारणों के चलते यह संस्करण नियत समय से देर से प्रकाशित हुआ। आपके धैर्य और निरंतर सहयोग के लिए हार्दिक आभार।